बड़ा खुलासा: गेहूं में यूरिया देने का सही समय, हर पौधे में निकलेंगे ज्यादा कल्ले

रबी सीजन में गेहूं की फसल किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन अच्छी पैदावार केवल बीज और सिंचाई पर निर्भर नहीं करती। सही समय पर सही खाद देना ही वह सबसे बड़ा फैक्टर है जो आपकी उपज को कई गुना बढ़ा सकता है। खासकर गेहूं में दूसरा खाद यानी टॉप ड्रेसिंग का समय और तरीका यदि सही नहीं अपनाया गया, तो फसल कमजोर रह सकती है और कल्ले यानी टिलर कम निकलते हैं। वहीं अगर इसे वैज्ञानिक तरीके से किया जाए, तो हर पौधे में भरपूर कल्ले निकलते हैं और उत्पादन में जबरदस्त वृद्धि होती है।

अक्सर किसान यह गलती कर बैठते हैं कि वे दूसरा खाद बहुत देर से या गलत मात्रा में दे देते हैं, जिससे पौधों की ग्रोथ प्रभावित होती है। इसलिए यह समझना बेहद जरूरी है कि दूसरा खाद कब देना है, कौन सा देना है और कैसे देना है ताकि गेहूं की फसल घनी और मजबूत बने।

गेहूं में दूसरा खाद कब देना चाहिए

गेहूं की फसल में दूसरा खाद देने का सबसे सही समय बुवाई के लगभग 20 से 25 दिन बाद होता है। इस समय फसल टिलरिंग स्टेज यानी कल्ले बनने की अवस्था में होती है। यही वह समय है जब पौधे तेजी से बढ़ते हैं और नए कल्ले निकलते हैं। अगर इस स्टेज पर सही मात्रा में नाइट्रोजन उपलब्ध हो जाए, तो पौधे ज्यादा शाखाएं बनाते हैं, जिससे प्रति पौधा बालियों की संख्या बढ़ जाती है। यही कारण है कि दूसरा खाद समय पर देना बेहद जरूरी होता है।

कौन सा खाद देना चाहिए

दूसरे खाद के रूप में सबसे ज्यादा इस्तेमाल यूरिया का किया जाता है, क्योंकि इसमें नाइट्रोजन की मात्रा अधिक होती है। नाइट्रोजन पौधों की वृद्धि और कल्ले बनने में अहम भूमिका निभाता है। आमतौर पर प्रति एकड़ 40 से 45 किलो यूरिया का उपयोग किया जाता है, लेकिन यह मात्रा मिट्टी की उर्वरता और फसल की स्थिति के अनुसार थोड़ी कम या ज्यादा हो सकती है। कुछ किसान बेहतर परिणाम के लिए सल्फर या जिंक युक्त उर्वरक भी साथ में उपयोग करते हैं।

सही तरीके से खाद डालने की तकनीक

केवल खाद देना ही काफी नहीं है, बल्कि इसे सही तरीके से देना भी उतना ही जरूरी है। यूरिया को हमेशा सिंचाई से पहले या हल्की नमी वाली मिट्टी में देना चाहिए ताकि यह अच्छी तरह घुलकर पौधों की जड़ों तक पहुंच सके। खाद को खेत में समान रूप से फैलाना जरूरी है ताकि हर पौधे को बराबर पोषण मिल सके। अगर खाद एक जगह ज्यादा और दूसरी जगह कम होगा, तो फसल असमान रूप से बढ़ेगी।

कल्ले बढ़ाने का खास तरीका

अगर आप चाहते हैं कि आपके गेहूं के खेत में हर पौधे से ज्यादा से ज्यादा कल्ले निकलें, तो आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा।

  • समय पर दूसरा खाद देना
  • खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना
  • खरपतवार को नियंत्रित करना
  • संतुलित उर्वरक का उपयोग करना
  • बीज की गुणवत्ता अच्छी रखना

इन सभी बातों को ध्यान में रखकर आप अपनी फसल को मजबूत बना सकते हैं और उत्पादन को बढ़ा सकते हैं।

दूसरा खाद देर से देने के नुकसान

अगर किसान दूसरा खाद समय पर नहीं देते, तो इसका सीधा असर फसल पर पड़ता है। देर से खाद देने पर पौधों में कल्ले कम बनते हैं और जो बनते हैं वे भी कमजोर होते हैं। इसके अलावा, बालियों की संख्या और दाने का आकार भी प्रभावित होता है, जिससे कुल उत्पादन में कमी आती है। इसलिए समय पर खाद देना बेहद जरूरी है।

मिट्टी परीक्षण का महत्व

खाद देने से पहले मिट्टी की जांच कराना भी बहुत जरूरी है। इससे आपको पता चलता है कि आपकी मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्व की कमी है। मिट्टी परीक्षण के आधार पर अगर आप खाद का उपयोग करते हैं, तो फसल को सही मात्रा में पोषण मिलता है और उत्पादन बेहतर होता है।

सिंचाई और खाद का सही तालमेल

दूसरा खाद देने के बाद हल्की सिंचाई करना बहुत जरूरी होता है। इससे खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाती है और पौधों की जड़ों तक पहुंचती है। अगर खाद देने के बाद सिंचाई नहीं की जाती, तो इसका पूरा लाभ फसल को नहीं मिल पाता।

Conclusion

गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए दूसरा खाद सही समय पर और सही मात्रा में देना बेहद जरूरी है। बुवाई के 20 से 25 दिन बाद यूरिया का उपयोग और सही तकनीक अपनाने से हर पौधे में ज्यादा कल्ले निकलते हैं और उत्पादन में जबरदस्त वृद्धि होती है। अगर किसान इन बातों का ध्यान रखते हैं, तो वे अपनी फसल से अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

Disclaimer: यह जानकारी सामान्य कृषि सलाह पर आधारित है। स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही निर्णय लें।

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