देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 2026 में अपनी आईएमपीएस (IMPS) सेवा शुल्कों में संशोधन किया है। 20 मार्च 2026 के ताज़ा सर्कुलर के अनुसार, अब ₹25,000 से ₹1 लाख के बीच के ऑनलाइन आईएमपीएस ट्रांजैक्शन पर ₹2 प्लस जीएसटी का शुल्क लगेगा। यदि आप ₹1 लाख से ₹2 लाख के बीच की राशि भेजते हैं, तो आपको ₹6 प्लस जीएसटी देना होगा, जबकि ₹2 लाख से ₹5 लाख तक के ट्रांजैक्शन पर ₹10 प्लस जीएसटी का शुल्क लागू होगा। यह बदलाव उन ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण है जो तत्काल फंड ट्रांसफर के लिए आईएमपीएस का अधिक उपयोग करते हैं। हालांकि, बैंक ने स्पष्ट किया है कि एनईएफटी (NEFT) और आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से किए गए डिजिटल ट्रांजैक्शन अभी भी पूरी तरह नि:शुल्क रहेंगे, इसलिए ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे बड़े भुगतान के लिए इन माध्यमों का चुनाव करें।
PNB ATM लिमिट 2026: नकदी निकासी की सीमा में भारी कटौती, अब दिन में निकाल सकेंगे केवल इतना पैसा
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने अपने ग्राहकों की सुरक्षा और डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए एटीएम से नकद निकासी (Cash Withdrawal) की सीमा को आधा कर दिया है। 20 मार्च 2026 के अपडेट के अनुसार, पीएनबी के रुपे (RuPay) और मास्टरकार्ड (MasterCard) के चुनिंदा वेरिएंट्स पर अब प्रतिदिन अधिकतम ₹50,000 ही निकाले जा सकेंगे, जो पहले ₹1 लाख थी। इसी तरह, कुछ प्रीमियम कार्ड्स की लिमिट ₹1.5 लाख से घटाकर ₹75,000 कर दी गई है। यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से कड़ाई से लागू होने जा रहा है, जिसका उद्देश्य बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को रोकना और रिस्क कंट्रोल को मजबूत करना है। यदि आपको अधिक नकदी की आवश्यकता है, तो आपको बैंक शाखा में जाकर चेक के माध्यम से निकासी करनी होगी या बैंक से अपनी लिमिट बढ़ाने का विशेष अनुरोध करना होगा।
कैनरा बैंक जीरो-बैलेंस नियम 2026: न्यूनतम बैलेंस का झंझट खत्म, ग्राहकों के लिए एक बड़ी राहत
कैनरा बैंक ने 2026 में अपने बचत खाताधारकों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव किया है, जिससे करोड़ों ग्राहकों को सीधे तौर पर फायदा होगा। 20 मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ने अब सभी नियमित बचत खातों (Savings Accounts) को ‘जीरो-बैलेंस’ श्रेणी में बदल दिया है। इसका अर्थ है कि अब खाताधारकों को अपने खाते में न्यूनतम औसत बैलेंस (MAB) बनाए रखने की कोई अनिवार्यता नहीं होगी। यदि आपके खाते में बैलेंस शून्य भी हो जाता है, तो बैंक आपसे कोई जुर्माना या ‘नॉन-मेंटेनेंस चार्ज’ नहीं वसूलेगा। यह कदम विशेष रूप से ग्रामीण और मध्यम वर्ग के उन ग्राहकों के लिए वरदान साबित होगा जो बैलेंस कम होने पर कटने वाले शुल्कों से परेशान रहते थे। हालांकि, बैंक ने यह भी साफ किया है कि अन्य सेवाओं जैसे चेकबुक और डेबिट कार्ड के वार्षिक शुल्क पहले की तरह ही लागू रहेंगे।
बैंकिंग नियमों में बदलाव: 2026 में प्रमुख बैंकों के सेवा शुल्कों और सुविधाओं की तुलनात्मक तालिका
नीचे दी गई तालिका 20 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार तीनों प्रमुख बैंकों के नए नियमों और शुल्कों का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत करती है।
| सेवा का नाम | SBI (नया नियम 2026) | PNB (नया नियम 2026) | कैनरा बैंक (नया नियम 2026) |
| न्यूनतम बैलेंस (MAB) | शून्य (Zero Balance) | ग्रामीण- ₹1,000 / मेट्रो- ₹10,000 | पूरी तरह शून्य (Zero) |
| IMPS शुल्क (₹2L-5L) | ₹10 + GST (ऑनलाइन) | ₹12 + GST (स्लैब आधारित) | ₹10 + GST (न्यूनतम) |
| ATM निकासी सीमा | कार्ड के प्रकार पर निर्भर | घटकर ₹50,000 हुई | वेरिएंट के आधार पर स्थिर |
| KYC समयसीमा | नियमित अपडेट जरूरी | 31 मार्च 2026 अंतिम तिथि | आधार आधारित डिजिटल KYC |
| बचत खाता ब्याज दर | 2.70% वार्षिक | 2.70% – 3.00% | 2.90% – 4.00% |
KYC डेडलाइन और अकाउंट फ्रीज: 31 मार्च 2026 से पहले इन दस्तावेजों को अपडेट करना है अनिवार्य
आरबीआई (RBI) के नए दिशा-निर्देशों के बाद पीएनबी और एसबीआई ने अपने उन ग्राहकों को अंतिम चेतावनी जारी की है जिनकी केवाईसी (KYC) लंबित है। 20 मार्च 2026 के ताज़ा संदेश के अनुसार, यदि आपने 31 मार्च 2026 तक अपना आधार, पैन और ताज़ा फोटोग्राफ बैंक में अपडेट नहीं किया, तो आपका खाता ‘इन-ऑपरेटिव’ (अक्रिय) कर दिया जाएगा। खाता फ्रीज होने की स्थिति में आप न तो एटीएम से पैसे निकाल पाएंगे और न ही किसी सरकारी योजना (जैसे PM Kisan या गैस सब्सिडी) का लाभ उठा सकेंगे। बैंक ने अब ‘वीडियो केवाईसी’ की सुविधा भी शुरू की है, जिससे आप घर बैठे मोबाइल के जरिए अपना सत्यापन पूरा कर सकते हैं। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी बैंक ब्रांच या मोबाइल ऐप के माध्यम से अपना केवाईसी स्टेटस आज ही जांच लें ताकि अंतिम समय की भीड़ और परेशानी से बचा जा सके।
डिजिटल सुरक्षा और एसएमएस अलर्ट: अब हर लेन-देन पर बढ़ेंगे सुरक्षा कवच और सावधानी के नियम
2026 में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए बैंकों ने अपने ‘डिजिटल बैंकिंग’ सुरक्षा नियमों को और कड़ा कर दिया है। अब किसी भी यूपीआई (UPI) या नेट बैंकिंग ट्रांजैक्शन के लिए केवल ओटीपी ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ₹50,000 से ऊपर के लेन-देन के लिए ‘मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ या फेस आईडी अनिवार्य की जा सकती है। 20 मार्च 2026 के नए अपडेट के अनुसार, अब ग्राहकों को हर सफल या विफल ट्रांजैक्शन का विस्तृत ‘रियल-टाइम अलर्ट’ उनके पंजीकृत मोबाइल और ईमेल पर भेजा जाएगा। यदि आपके खाते से कोई संदिग्ध गतिविधि होती है, तो आप तुरंत ‘हेल्पलाइन 1930’ पर कॉल करके अपना खाता ब्लॉक करवा सकते हैं। साथ ही, बैंकों ने अब ‘सिम बाइंडिंग’ (Sim Binding) फीचर को भी अनिवार्य कर दिया है, जिससे आपकी बैंकिंग ऐप केवल उसी फोन में चलेगी जिसमें बैंक में रजिस्टर्ड सिम कार्ड मौजूद होगा।
निष्कर्ष: 2026 में बैंकिंग सेवाओं का बदलता स्वरूप और ग्राहकों की जिम्मेदारी
अंततः 20 मार्च 2026 का यह ताज़ा अपडेट स्पष्ट करता है कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली अब पूरी तरह से सुरक्षा और डिजिटल पारदर्शिता की ओर बढ़ रही है। जहाँ एक ओर कैनरा बैंक और एसबीआई ने न्यूनतम बैलेंस हटाकर ग्राहकों को बड़ी राहत दी है, वहीं पीएनबी ने एटीएम निकासी सीमा घटाकर सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। 31 मार्च 2026 की समयसीमा का ध्यान रखना और अपने डिजिटल लेन-देन के प्रति जागरूक रहना ही भविष्य में किसी भी वित्तीय नुकसान से बचने का एकमात्र तरीका है। अपने बैंक के आधिकारिक ऐप को हमेशा अपडेट रखें और किसी भी नए नियम की जानकारी के लिए केवल बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी 20 मार्च 2026 तक एसबीआई, पीएनबी और कैनरा बैंक द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचनाओं, आरबीआई के दिशा-निर्देशों और विभिन्न विश्वसनीय समाचार स्रोतों पर आधारित है। बैंक किसी भी समय अपने सेवा शुल्कों और नियमों में परिवर्तन कर सकते हैं, इसलिए किसी भी वित्तीय निर्णय या ट्रांजैक्शन से पहले अपने बैंक की आधिकारिक वेबसाइट (sbi.co.in, pnbindia.in, canarabank.com) पर ताज़ा दरों और शर्तों की जांच अवश्य करें। यह लेख केवल जन-जागरूकता और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है।